रात की भूतिया राह
गाँव बाबुपुर में एक छोटे से गहरे अंधेरे जंगल में एक भूतिया राह थी। लोग कहते थे कि उस राह पर रात को एक अजीब आवाज सुनाई देती है, जिसने जो भी सुना उसने वहां से निकलने का कभी नहीं सोचा।
एक रात, गाँव का एक बहादुर युवक, विक्रम, ने दोस्तों के साथ रात के समय वहां जाने का निर्णय किया। सभी लोग डरे हुए उसे रोकने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उसने उन्हें हंसते हुए ठुकरा दिया।
जंगल की गहराईयों में, रास्ता बहुती अँधेरा था। विक्रम और उसके दोस्तों ने टॉर्चलाइट्स लेकर अपना साहस बनाए रखा। राह पर बढ़ते हुए, उन्होंने एक अजीब सी आवाज सुनी, जैसे कोई रो रहा हो।
दूसरी ओर बढ़ते हुए, उन्होंने एक पुराने हाथी की हड्डी की चरण ध्वनि सुनी। विक्रम की सांसें थम गईं, लेकिन उसने दोस्तों को इत्राकर आगे बढ़ने का निर्णय किया।
बार-बार हड्डी की चरण ध्वनि आ रही थी, और रात का अँधेरा और भी भयंकर हो रहा था। विक्रम ने एक पुराने मक्कड़ की तरह बड़ी आँखों वाली कुछ चीज देखी, जो अंधकार में छिपी हुई थी।
धीरे-धीरे वह चीज उनकी ओर आ रही थी, और विक्रम ने खुद को बुरी तरह से परेशान महसूस किया। चीज के पास पहुंचते ही, उसने एक विकराल चीख लगाई और टॉर्चलाइट गिरा दी।
और फिर, विक्रम ने हैरानी से देखा कि वह चीज कुछ और नहीं बल्कि गाँव का बूढ़ा गाँववाला था, जिसने अपने पुराने हाथी के हड्डी की चरणों की आवाज बनाई रखी थी, ताकि गाँववाले रात को उस राह से दूर रहें। उस बूढ़े आदमी को भूत बनाने के लिए उसने यह सारी योजना बनाई थी।
विक्रम ने गाँववाले को बताया कि वह भूत नहीं बल्कि गाँव का अपना ही आदमी है, जिसने सबको डराने का यह उपाय अपनाया था। गाँववाले ने उसकी कड़ी मेहनत की सराहना की और उससे माफी मांगी।
इस घड़ी में, विक्रम ने एक महत्वपूर्ण सिख हासिल की कभी-कभी हमारी भयंकर भूतिया कहानियाँ हमारे ही बीच होती हैं, और हमें अच्छे और बुरे के बीच विवेकपूर्णता की आवश्यकता होती है।
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